राजस्थान में पाली जिले के सुमेरपुर में रहने वाले सोहन सिंह ने अपने छोटे भाई शेल सिंह की शादी 2012 में मनीषा परमार के साथ करवाई थी. मनीषा परमार गुजरात के वडोदरा के मेटी गांव की रहने वाली है. पहले तो यह गैंग आसपास घूमकर लोगों से मेल-मिलाप करता था. जब इनकोयह पता चलता है कि वह इनके झांसे में आ जाएगा तो यह गैंग शादी के लिए लोगों से बात करते थे.
किस तरह देते थे धोखा
गैंग पहले लड़के के समाज के बारे में पता करते थे फिर लड़की को उसी समाज की बताकर शादी का प्रस्ताव रखते थे. इसके लिए वे लड़के वाले पक्ष से मोटी रकम वसूल करते थे. शादी के एक-दो दिन बाद परिवार को नशीली चीज खिलाकर घर में रखे पैसे व जेवरात लेकर लड़की अपने साथियोंके साथ फरार हो जाती थी.
मनीषा परमार ने बताया कि पहले भी शादियों का झांसा देकर कई लोगों को फंसाया है. मनीषा उन्हें लूटकर फरार हो गई थी. हर बार वह बच जाती थी लेकिन इस बार मोबाइल की वजह से वह पुलिस की पकड़ में आ गई.
ऐसे पकड़ी गई लुटेरी दुल्हन
पाली जिला पुलिस की सीआई, एसआई के नेतृत्व में टीम गुजरात भेजी गई जहां यह दिव्या बेन के नाम से रह रही थी, लेकिन मोबाइल लोकेशन की बदौलत यह लुटेरी दुल्हन पुलिस के हत्थे चढ़ गई. दुल्हन ने अपनी सिम तो बदल दी पर मोबाइल बदलना भूल गई जिससे पुलिस को इसे पकड़ने मेंसफलता मिली. पुलिस लुटेरी दुल्हन से पूछताछ कर रही है कि उसने कितने लोगों को इस तरह से ठगा है.
अपनों ने ही किया वीपी के फैसले का विरोध
वीपी सरकार के विरोध में जब ओडिशा में प्रदर्शनकारी पुलिस फायरिंग की जद में आए तो तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के विरोधी स्वर सबसे पहले बाहर आए. बीजू पटनायक जनता दल की ही सरकार चला रहे थे और उन्होंने अपनी ही पार्टी के प्रधानमंत्री के फैसले का विरोध करते हुए उन पर जातीय हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप मढ़ दिया. बीजू पटनायक के अलावा वीपी सिंह के करीबियों में यशवंत सिन्हा और हरमोहन धवन ने भी उनके फैसले की सार्वजनिक तौर पर आलोचना की. वीपी सिंह से खार खाए बैठे चंद्रशेखर ने कहा था कि सरकार का इसे लागू करने का तरीका गलत है. वीपी सरकार के मंत्री अरुण नेहरू और आरिफ मोहम्मद खां भी असंतुष्ट नेताओं की कतार में खड़े नजर आए.
विरोध में राजीव गांधी लाए प्रस्ताव
कांग्रेस पार्टी ने भी वीपी सरकार के फैसले की पुरजोर मुखालफत की. राजीव गांधी मणिशंकर अय्यर द्वारा तैयार प्रस्ताव लेकर आए, जिसमें मंडल कमीशन की रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज किया गया. जिस वक्त यह फैसला आया तब वीपी सिंह की सरकार को बीजेपी बाहर से सशर्त समर्थन दे रही थी. लेकिन राजीव गोस्वामी से मिलने जब तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी एम्स अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अगड़ी जाति के नौजवानों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा. आडवाणी ने वक्त की नजाकत को भांपा और उसके बाद मंडल के जवाब में कमंडल की राजनीति तेज कर दी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी ने वीपी सरकार को फैसले पर पुनर्विचार नहीं करने पर समर्थन वापसी का भी दबाव बनाया, लेकिन बीजेपी इस मसले पर कोई स्पष्ट स्टैंड नहीं ले पाई.
किस तरह देते थे धोखा
गैंग पहले लड़के के समाज के बारे में पता करते थे फिर लड़की को उसी समाज की बताकर शादी का प्रस्ताव रखते थे. इसके लिए वे लड़के वाले पक्ष से मोटी रकम वसूल करते थे. शादी के एक-दो दिन बाद परिवार को नशीली चीज खिलाकर घर में रखे पैसे व जेवरात लेकर लड़की अपने साथियोंके साथ फरार हो जाती थी.
मनीषा परमार ने बताया कि पहले भी शादियों का झांसा देकर कई लोगों को फंसाया है. मनीषा उन्हें लूटकर फरार हो गई थी. हर बार वह बच जाती थी लेकिन इस बार मोबाइल की वजह से वह पुलिस की पकड़ में आ गई.
ऐसे पकड़ी गई लुटेरी दुल्हन
पाली जिला पुलिस की सीआई, एसआई के नेतृत्व में टीम गुजरात भेजी गई जहां यह दिव्या बेन के नाम से रह रही थी, लेकिन मोबाइल लोकेशन की बदौलत यह लुटेरी दुल्हन पुलिस के हत्थे चढ़ गई. दुल्हन ने अपनी सिम तो बदल दी पर मोबाइल बदलना भूल गई जिससे पुलिस को इसे पकड़ने मेंसफलता मिली. पुलिस लुटेरी दुल्हन से पूछताछ कर रही है कि उसने कितने लोगों को इस तरह से ठगा है.
अपनों ने ही किया वीपी के फैसले का विरोध
वीपी सरकार के विरोध में जब ओडिशा में प्रदर्शनकारी पुलिस फायरिंग की जद में आए तो तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के विरोधी स्वर सबसे पहले बाहर आए. बीजू पटनायक जनता दल की ही सरकार चला रहे थे और उन्होंने अपनी ही पार्टी के प्रधानमंत्री के फैसले का विरोध करते हुए उन पर जातीय हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप मढ़ दिया. बीजू पटनायक के अलावा वीपी सिंह के करीबियों में यशवंत सिन्हा और हरमोहन धवन ने भी उनके फैसले की सार्वजनिक तौर पर आलोचना की. वीपी सिंह से खार खाए बैठे चंद्रशेखर ने कहा था कि सरकार का इसे लागू करने का तरीका गलत है. वीपी सरकार के मंत्री अरुण नेहरू और आरिफ मोहम्मद खां भी असंतुष्ट नेताओं की कतार में खड़े नजर आए.
विरोध में राजीव गांधी लाए प्रस्ताव
कांग्रेस पार्टी ने भी वीपी सरकार के फैसले की पुरजोर मुखालफत की. राजीव गांधी मणिशंकर अय्यर द्वारा तैयार प्रस्ताव लेकर आए, जिसमें मंडल कमीशन की रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज किया गया. जिस वक्त यह फैसला आया तब वीपी सिंह की सरकार को बीजेपी बाहर से सशर्त समर्थन दे रही थी. लेकिन राजीव गोस्वामी से मिलने जब तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी एम्स अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अगड़ी जाति के नौजवानों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा. आडवाणी ने वक्त की नजाकत को भांपा और उसके बाद मंडल के जवाब में कमंडल की राजनीति तेज कर दी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी ने वीपी सरकार को फैसले पर पुनर्विचार नहीं करने पर समर्थन वापसी का भी दबाव बनाया, लेकिन बीजेपी इस मसले पर कोई स्पष्ट स्टैंड नहीं ले पाई.
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